पुंडरीक स्वामी भगवान आदिनाथ के प्रथम गणधर थे, जिन्होंने इसी पर्वत पर मोक्ष प्राप्त किया था।
भगवान आदिनाथ ने इसी रायण वृक्ष के नीचे ध्यान लगाया था। यह स्थान अत्यंत प्राचीन और ऊर्जावान माना जाता है। यहाँ चैत्यवंदन करने से साधक को वैराग्य और ध्यान की शक्ति प्राप्त होती है।
पालीताना (शत्रुंजय महातीर्थ) की यात्रा में 5 मुख्य चैत्यवंदन
4. चतुर्थ चैत्यवंदन: श्री सिद्धाचल (The Holy Hill - Siddhachal)